स्पर्श गंगा अभियान

कल की सुख, शांति और समृद्धि का विकल्प,आज का जल संरक्षण और गंगा स्वच्छता का संकल्प।

इस धरती पर प्रत्येक जलस्त्रोत और जलधारा गंगा के समान ही पावन और जीवनदायिनी है। जल का प्रवाह गंगा के पावन प्रवाह के समतुल्य है। प्रत्येक जलस्त्रोत तथा जलधाराओं को सुरक्षित तथा स्वच्छ रखना गंगा स्वच्छता अभियान के लिए प्रत्येक नागरिक का अमूल्य योगदान बन सकता है।

प्रत्येक नदी, जलधारा, स्त्रोत, झील, तालाब की प्रत्येक जल की बँूद ‘स्पर्श गंगायें’ हैं। जल की प्रत्येक बूँद को स्वच्छ तथा संरक्षित रखना स्पर्श गंगा अभियान है। इस अभियान का हिस्सा बनकर गंगा स्नान के महत्व के समान ही पुण्य अर्जित किया जा सकता है। यह प्रयास ‘गंगा स्तुति’ है।

माँ गंगा एवं सहायक नदियों की स्वच्छता, निर्मलता, अविरलता और पावनता के संरक्षण सवर्धन हेतु तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में हरिद्वार सांसद डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी द्वारा 2009 में शुरू किये “स्पर्श गंगा अभियान” से जुड़ने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । आइये अपने गाँव, शहर, कस्बोे की समस्त जलधाराओं, जलस्त्रोतों, झील, तालाबों के जल को संरक्षित व् स्वच्छ रखने का संकल्प लेकर गंगा स्वच्छता अभियान में अपना योगदान दें।

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आपो वा इदाः सर्वम् विश्वभूतान्यापाः।
श्रागावापः पासव अपोन्नमपोमृतम् आपः।।

जल ही ब्रह्माण्ड, उसका भूत और उसका वर्तमान है। खाद्य पदार्थ और जीव जल हैं,
आसपास की सारी वनस्पति जल है और जल जीवन के लिए अमृत के समान है।


हिमालय संरक्षण अभियान
स्पर्श हिमालय अभियान

हिमालय संस्कृत के हिम तथा आलय दो शब्दों से मिल कर बना है, जिसका शब्दार्थ बर्फ का घर होता है। यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद पृथ्वी पर सबसे बड़ा हिमआवरण वाला क्षेत्र है। हिमालय और विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को भी कई नामों से जाना जाता है। नेपाल में इसे सगरमाथा (आकाश या स्वर्ग का भाल), संस्कृत में देवगिरी और तिब्बती में चोमोलुंगमा (पर्वतों की रानी) कहते हैं। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुंछ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में स्थित है। इसकी ऊँचाई 13,731 फुट है। इसे सुमेरु भी कहते हैं।

हिमालय पर्वत विविध प्राकृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से महत्वपूर्ण है। हिमालय पर्वत का महत्व न केवल इसके आसपास के देशों के लिये है बल्कि पूरे विश्व के लिये है क्योंकि यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद पृथ्वी पर सबसे बड़ा हिमाच्छादित क्षेत्र है जो विश्व जलवायु को भी प्रभावित करता है।

दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग और पारिस्थितकीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। भारत समेत कई विकासशील देश इसकी जद में है। हिमालय में लगातार हो रही मानवीय दखल से आपदाएं आना स्वाभाविक है। पर्यावरण संरक्षण को हिमालय की सुरक्षा से देखा जाना चाहिए। हिमालय बचेगा तो देश बचेगा।

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